देहरादून। उर्जा कर्मचारी अपने संघों के समझाने-बुझाने के बाद काम पर लौट गए हैं लेकिन देर रात तक कर्मचारी और संघ में तकरार जारी रही।

कर्मचारी अपने संघ के अधिकारियों की बात ना मानने पर अड़े रहे लेकिन सरकार द्वारा जारी एस्मा का असर भी इन के ऊपर देखा गया। गुस्से में कई कर्मचारियों ने संघ पर सरकार से मिलीभगत करने का आरोप भी लगाया और नाते तोड़ लिए।

कर्मचारियों ने अपने संघ के नेताओं को चेतावनी दी है कि वे उनकी बात मानकर काम पर वापस लौट तो रहे हैं लेकिन 1 महीने के अंदर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो संघ के पदाधिकारियों के दोबारा चयन पर भी विचार किया जा सकता है। कर्मचारियों के गुस्सा को देखते हुए संघों के पदाधिकारी भी दबाव में हैं।

आंदोलन को वापस लेने के बाद संघों के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी ज़्यादा बढ़ गई है कि वे मंत्री और शासन स्तर पर बातचीत करके 1 महीने के अंदर इस मामले का हल निकाले।

कर्मचारियों के रुख को देखते हुए ऐसा लगता है कि अगर 1 महीने के अंदर हल नहीं निकाला गया तो कर्मचारियों का गुस्सा दोबारा फूट सकता है। हालांकि राज्य में एस्मा लागू है।

वही एक दिन की हड़ताल से ही राज्य में बिजली उत्पादन तकरीबन ठप होने की सूचना है, जिससे हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। दूसरी तरफ बिजली आपूर्ति बाधित होने से उद्योग जगत को 300 करोड़ के घाटे की बात सामने आ रही है।

Uttarakhand Goverment

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