Uttarakhand Goverment

देहरादून। 2022 चुनाव के मद्देनजर उत्तराखंड में राजनीतिक उठापटक अभी से दिखने लगा है। एक तरफ बीजेपी अपने कुनबे को बढ़ाने में लगी हुई है तो दूसरी तरफ कांग्रेस में आपसी झगड़े खत्म नहीं हो रहे हैं। आज कांग्रेस के पूर्व विधायक राजकुमार ने बीजेपी का दामन दिल्ली में थाम लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और अनिल बलूनी मौजूद थे।

बीजेपी कुछ दिनों पहले निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार को अपने कुनबे में शामिल करके यह मैसेज देने की कोशिश की थी कि बीजेपी फिर से सत्ता में आ रही है इसलिए दूसरे दलों के नेता अभी भी बीजेपी की तरफ रुख कर रहे हैं। दूसरी तरफ गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस हरीश रावत की बदौलत आगे बढ़ रही है। हरीश रावत की नेतृत्व की वजह से कॉन्ग्रेस कई बार मजबूत दिखती है तो कई बार बेहद ही कमजोर। पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनकी कप्तानी की वजह से दर्जनभर विधायक कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। चुनाव में खुद हरीश रावत दो जगह से विधानसभा में चुनाव लड़े और दोनों ही विधानसभा सीट से हार गए थे।

एक बार फिर से हरीश रावत ने रणनीतिक तौर पर संगठन पर अपने खेमे के गणेश गोदियाल को बिठाकर पार्टी की शक्ति को अपने हाथ में ले लिया है। लेकिन वह फिर से अपने विधायकों को संभालने में अभी तक असफल ही साबित हुए हैं। हरीश रावत राज्य के सबसे पुराने, अनुभवी और करिश्माई नेता जरूर है, लेकिन उनके नेतृत्व में पार्टी के विधायकों का पार्टी छोड़ जाना कई सवाल खड़े कर रहे हैं। यह सवाल और भी संकट में तब डाल देता है जब सबको यह पता था कि राजकुमार बीजेपी के संपर्क में थे फिर भी डैमेज कंट्रोल करने की वजह कांग्रेस के नेता सोते रहे।

यही वजह है की अब अपने भी हरीश और उनके लोगों के कामकाज पर सवाल खड़ा करने लगे हैं सवाल उठता है ऐसे वक्त में जब 2022 का चुनाव सामने हैं हरीश रावत और गणेश अपने कुनबे को क्यों नहीं संभाल पा रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो चुनाव से पहले ही कांग्रेस चुनाव हारती नजर आएगी।

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